श्रीभरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक
भरतजी और शत्रुघ्नजी अयोध्या पहुँचते हैं, पर नगर को शोकमग्न देखकर उनका हृदय व्याकुल हो उठता है। पिता महाराज दशरथ के देहावसान और श्रीरामजी के वनगमन का समाचार पाकर वे विलाप करने लगते हैं।
अयोध्याकाण्ड · प्रकरण २६ / ४९
प्रकरण पाठ
खग मृग हय गय जाहिं न जोए। राम बियोग कुरोग बिगोए॥ नगर नारि नर निपट दुखारी। मनहुँ सबन्हि सब संपति हारी॥ ४ ॥
अर्थ:
श्रीरामजी के वियोगरूपी बुरे रोग से सताये हुए पक्षी-पशु, घोड़े-हाथी [ऐसे दुखी हो रहे हैं कि] देखे नहीं जाते। नगर के स्त्री-पुरुष अत्यन्त दुखी हो रहे हैं। मानो सब ने अपनी सारी सम्पत्ति हार बैठी हो।
चलत न देखन पायउँ तोही। तात न रामहि सौंपेहु मोही॥ बहुरि धीर धरि उठे सँभारी। कहु पितु मरन हेतु महतारी॥ ३ ॥
अर्थ:
[और विलाप करने लगे कि] हे तात! मैं आपको [स्वर्ग जाते समय] चलते हुए देख भी न सका। [हाय!] आप मुझे श्रीरामजी को सौंप भी नहीं गये! फिर धीरज धरकर वे सँभलकर उठे और बोले--माता! पिताके मरने का कारण तो बताओ।
जौं पै कुरुचि रही अति तोही। जनमत काहे न मारे मोही॥ पेड़ काटि तैं पालउ सींचा। मीन जिअन निति बारि उलीचा॥ ४ ॥
अर्थ:
हाय! यदि तेरी ऐसी ही अत्यन्त बुरी रुचि थी, तो तूने जन्मते ही मुझे मार क्यों नहीं डाला? तूने पेड़ को काटकर पत्ते को सींचा है और मछली के जीने के लिए पानी को उलीच डाला! (अर्थात् मेरा हित करने जाकर उलटा तूने मेरा अहित कर डाला)।
जब तैं कुमति कुमत जियँ ठयऊ। खंड खंड होइ हृदउ न गयऊ॥ बर मागत मन भइ नहिं पीरा। गरि न जीह मुहँ परेउ न कीरा॥ १ ॥
अर्थ:
अरी कुमति! जब तूने हृदय में यह बुरा विचार (निश्चय) ठाना, उसी समय तेरे हृदय के टुकड़े-टुकड़े [क्यों] न हो गये? वरदान माँगते समय तेरे मन में कुछ भी पीड़ा नहीं हुई? तेरी जीभ गल नहीं गयी? तेरे मुँह में कीड़े नहीं पड़ गये?
भूपँ प्रतीति तोरि किमि कीन्ही। मरन काल बिधि मति हरि लीन्ही॥ बिधिहुँ न नारि हृदय गति जानी। सकल कपट अघ अवगुन खानी॥ २ ॥
अर्थ:
राजाने तेरा विश्वास कैसे कर लिया? [जान पड़ता है,] विधाता ने मरने के समय उनकी बुद्धि हर ली थी। विधि भी नारी के हृदय की गति नहीं जान सके। वह सम्पूर्ण कपट, पाप और अवगुणों की खान है।
लखि रिस भरेउ लखन लघु भाई। बरत अनल घृत आहुति पाई॥ हुमगि लात तकि कूबर मारा। परि मुह भर महि करत पुकारा॥ २ ॥
अर्थ:
उसे देखकर लक्ष्मण के छोटे भाई शत्रुघ्नजी क्रोध से भर गये। मानो जलती हुई आग को घी की आहुति मिल गयी हो। उन्होंने जोर से लात तानकर कूबड़ पर प्रहार किया। वह चिल्लाती हुई मुँह के बल धरती पर गिर पड़ी।