सजि आरती मुदित उठि धाई
सजि आरती मुदित उठि धाई
चौपाई २, दोहा १५९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सजि आरती मुदित उठि धाई। द्वारेहिं भेंटि भवन लेइ आई॥ भरत दुखित परिवारु निहारा। मानहुँ तुहिन बनज बनु मारा॥ २ ॥
अर्थ
वह आरती सजाकर आनन्द में भरकर उठ दौड़ी और दरवाजे पर ही मिलकर भरत को भवन में ले आई। भरत ने सारे परिवार को दुखी देखा। मानो कमलों के वन को पाला मार गया हो।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या आगमन और दशरथ-निधन व राम-वनगमन का शोक का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक