खग मृग हय गय जाहिं न

चौपाई ४, दोहा १५८ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

खग मृग हय गय जाहिं न जोए। राम बियोग कुरोग बिगोए॥ नगर नारि नर निपट दुखारी। मनहुँ सबन्हि सब संपति हारी॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरामजी के वियोगरूपी बुरे रोग से सताये हुए पक्षी-पशु, घोड़े-हाथी [ऐसे दुखी हो रहे हैं कि] देखे नहीं जाते। नगर के स्त्री-पुरुष अत्यन्त दुखी हो रहे हैं। मानो सब ने अपनी सारी सम्पत्ति हार बैठी हो।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या आगमन और दशरथ-निधन व राम-वनगमन का शोक का वर्णन है।

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भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक