भे अति अहित रामु तेउ तोही

चौपाई ४, दोहा १६२ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

भे अति अहित रामु तेउ तोही। को तू अहसि सत्य कहु मोही॥ जो हसि सो हसि मुहँ मसि लाई। आँखि ओट उठि बैठहि जाई॥ ४ ॥

अर्थ

वे श्रीरामजी भी तुझे अहित हो गये (वैरी लगे)! तू कौन है? मुझे सच-सच कह! तू जो है, सो है, अब मुँह में स्याही पोतकर (मुँह काला करके) उठकर मेरी आँखों की ओट में जा बैठ।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या आगमन और दशरथ-निधन व राम-वनगमन का शोक का वर्णन है।

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भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक