परिचय

इस परियोजना के बारे में

श्रीरामचरितमानस को आदरपूर्वक, विज्ञापन-मुक्त और सुगठित रूप में वेब पर प्रस्तुत करने का यह एक छोटा प्रयास है, जिसमें पाठ की शुद्धता, संरचना और पठन-अनुभव पर विशेष ध्यान दिया गया है।
राम नवमी २०२६ पर प्रथम सार्वजनिक संस्करणनिर्माताRajeev R Sharma
पृष्ठभूमि

यह परियोजना कैसे आरम्भ हुई

यह परियोजना एक पहले बने भक्तिपरक ऐप, उसके शांत किन्तु वास्तविक उपयोग, और फिर श्रीरामचरितमानस के लिए अधिक संपूर्ण पठन-अनुभव बनाने के संकल्प से विकसित हुई।
जनवरी २०२४

पहले श्रीराम शलाका प्रकाशित हुई

इससे पहले श्रीराम शलाका ऐप प्रकाशित हुआ। उस पर कार्य पहले ही प्रारम्भ हो चुका था और उसकी प्रेरणा रचनाकार को उनके भाई से मिली थी। अयोध्या में श्रीराम मंदिर उद्घाटन के समय ने उसे २५–२६ जनवरी २०२४ के आसपास प्रकाशित करने की अंतिम प्रेरणा दी।

राम शलाका
जनवरी २०२५

एक नया संकल्प बना

जब बिना किसी प्रचार के श्रीराम शलाका ऐप पर स्वाभाविक रूप से लोग आने लगे, तब यह संकल्प बना कि अब पूरे श्रीरामचरितमानस के लिए एक समर्पित ऐप बनाया जाए, जिसमें पाठ, संरचना और पठन-अनुभव अधिक सुविचारित हो।

मार्च-अप्रैल २०२६

पहला संस्करण सामने आया

राम नवमी २०२६ के अवसर पर इस परियोजना का पहला संस्करण प्रस्तुत किया गया। यह एक आधार-रूप है, ताकि काण्डों, प्रकरणों और छंदों को स्वच्छ ढंग से पढ़ा जा सके और आगे इसे और समृद्ध किया जा सके।

पठन

पठन अनुभव

यह इंटरफ़ेस शांत पठन, सरल नेविगेशन, मोबाइल पर सहजता और मूल पाठ की सतत सावधानी को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

विज्ञापन-मुक्त

पृष्ठ का ध्यान केवल पाठ पर रहता है, विज्ञापनों या अनावश्यक व्यवधानों पर नहीं।

मोबाइल अनुकूल

लेआउट मोबाइल के लिए सहज है और बड़े पर्दों पर भी खुला लगता है।

स्रोत-मिलानित पाठ

कई स्रोत-अंतर गीताप्रेस संस्करण से मिलाकर सुधारे गए हैं और शेष सुधार जारी हैं।

भक्ति-भाव से निर्मित

पवित्र ग्रंथ का सम्मानजनक प्रस्तुतिकरण

प्रामाणिकता

गीताप्रेस संस्करण से मिलान

इस संस्करण को गीताप्रेस गोरखपुर के पाठ से मिलाकर सुधारा जा रहा है। अलग-अलग स्रोतों में जहाँ छंदों में अंतर मिला, उनमें से अनेक स्थानों की मूल प्रति से जाँच कर सुधार किया गया है, और शेष पाठ पर सावधानीपूर्वक कार्य जारी है।

यहाँ पाठ की गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई स्रोतों में मिले अंतर गीताप्रेस प्रति से मिलाकर सुधारे गए हैं, और शेष पाठ पर सावधानीपूर्वक कार्य जारी है।

उद्देश्य केवल पाठ को उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसे ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है जो विश्वसनीय, सरल और बार-बार पढ़ने योग्य लगे।