मुनि वशिष्ठ का भरतजी को बुलाने के लिये दूत भेजना
महाराज दशरथ के देहावसान के बाद मुनि वशिष्ठ राज्य के आवश्यक कार्य सँभालते हैं। वे दूतों को भेजकर भरतजी और शत्रुघ्नजी को तत्काल अयोध्या बुलवाते हैं।
अयोध्याकाण्ड · प्रकरण २५ / ४९
प्रकरण पाठ
तेल नावँ भरि नृप तनु राखा। दूत बोलाइ बहुरि अस भाषा॥ धावहु बेगि भरत पहिं जाहू। नृप सुधि कतहुँ कहहु जनि काहू॥ १ ॥
अर्थ:
वसिष्ठजी ने नाव में तेल भरवाकर राजा के शरीर को उसमें रखवा दिया। फिर दूतों को बुलवाकर उनसे ऐसा कहा--तुम लोग जल्दी दौड़कर भरत के पास जाओ। राजा की मृत्यु का समाचार कहीं किसी से न कहना।