राम बिरोधी हृदय तें प्रगट कीन्ह

दोहा १६२ · अयोध्याकाण्ड

दोहा पाठ

राम बिरोधी हृदय तें प्रगट कीन्ह बिधि मोहि। मो समान को पातकी बादि कहउँ कछु तोहि॥ १६२ ॥

अर्थ

विधाता ने मुझे श्रीरामजी से विरोध करनेवाले हृदय से उत्पन्न किया [अथवा विधाता ने मुझे हृदय से राम का विरोधी जाहिर कर दिया]। मेरे बराबर पापी दूसरा कौन है? मैं व्यर्थ ही तुझे कुछ कहता हूँ।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक” प्रकरण का दोहा १६२ है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या आगमन और दशरथ-निधन व राम-वनगमन का शोक का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक