लखि रिस भरेउ लखन लघु भाई

चौपाई २, दोहा १६३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

लखि रिस भरेउ लखन लघु भाई। बरत अनल घृत आहुति पाई॥ हुमगि लात तकि कूबर मारा। परि मुह भर महि करत पुकारा॥ २ ॥

अर्थ

उसे देखकर लक्ष्मण के छोटे भाई शत्रुघ्नजी क्रोध से भर गये। मानो जलती हुई आग को घी की आहुति मिल गयी हो। उन्होंने जोर से लात तानकर कूबड़ पर प्रहार किया। वह चिल्लाती हुई मुँह के बल धरती पर गिर पड़ी।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या आगमन और दशरथ-निधन व राम-वनगमन का शोक का वर्णन है।

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भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक