श्री गणेशाय नमः। श्री सीतारामाभ्यां नमः।

श्रीरामचरितमानस

गोस्वामी तुलसीदास रचित रामकथा

मूल पाठ, अर्थ, लिप्यंतरण और प्रकरणानुसार नेविगेशन के साथ श्रीरामचरितमानस का स्वच्छ और सुगठित पाठ।

काण्ड
१,१७२
दोहे
८७
सोरठे
४,६३८
चौपाइयाँ
२३१
छन्द
२७
श्लोक
गीताप्रेस संस्करण से मिलान
काण्ड

सातों काण्ड देखें

काण्ड से प्रकरण तक क्रमबद्ध नेविगेशन के साथ पाठ, अर्थ और लिप्यंतरण पढ़ें।
काण्ड १
-
बालकाण्ड

बालकाण्ड में भगवान राम के जन्म, बचपन, गुरु विश्वामित्र की शिक्षा और शिव धनुष तोड़कर सीता से विवाह का वर्णन है।

मुख्य प्रसंग: राम जन्म, सीता स्वयंवर, शिव धनुष भंग
काण्ड २
-
अयोध्याकाण्ड

अयोध्याकाण्ड में राम के वनवास, भरत की अनुपम भक्ति और कर्तव्य तथा त्याग की गहन शिक्षाओं का वर्णन है।

मुख्य प्रसंग: कैकेयी की माँग, राम वनवास, भरत की भक्ति
काण्ड ३
-
अरण्यकाण्ड

अरण्यकाण्ड में वनवास के वर्षों, ऋषियों और राक्षसों से मिलन और रावण द्वारा सीता हरण का वर्णन है।

मुख्य प्रसंग: वन जीवन, ऋषियों से मिलन, सीता हरण
काण्ड ४
-
किष्किन्धाकाण्ड

किष्किन्धाकाण्ड में वानर राज सुग्रीव से मित्रता, हनुमान से मिलन और सीता की खोज का वर्णन है।

मुख्य प्रसंग: हनुमान मिलन, सुग्रीव मित्रता, सीता खोज
काण्ड ५
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सुन्दरकाण्ड

सुन्दरकाण्ड में हनुमान की समुद्र लांघने की वीरता, सीता से मिलन और लंका दहन का वर्णन है।

मुख्य प्रसंग: हनुमान का समुद्र लांघना, सीता मिलन, लंका दहन
काण्ड ६
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लंकाकाण्ड

लंकाकाण्ड में धर्म और अधर्म का महायुद्ध, वानर सेना का पराक्रम और भगवान राम की रावण पर विजय का वर्णन है।

मुख्य प्रसंग: सेतु निर्माण, महायुद्ध, रावण वध
काण्ड ७
-
उत्तरकाण्ड

उत्तरकाण्ड में अयोध्या में विजयी वापसी, राम का राज्याभिषेक, रामराज्य की स्थापना और गहन आध्यात्मिक शिक्षाओं का वर्णन है।

मुख्य प्रसंग: अयोध्या वापसी, राम राज्य, आध्यात्मिक शिक्षा
ग्रंथ परिचय

श्रीरामचरितमानस क्या है?

श्रीरामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा अवधी में रचित रामकथा है, जो सात काण्डों में विभाजित है और काव्य तथा भक्तिपरक ग्रंथ दोनों रूपों में पढ़ी जाती है।

भक्ति और कथा

इस ग्रंथ में दोहा, चौपाई, सोरठा, छन्द और श्लोक के माध्यम से रामकथा, भक्ति, नीति और आत्मचिंतन को बार-बार पढ़े जाने योग्य रूप मिला है।

इसके सात काण्ड मंगलाचरण और बाललीला से लेकर वनगमन, भक्ति, युद्ध, अयोध्या-वापसी और धर्मचिंतन तक कथा को क्रम से आगे बढ़ाते हैं। अनेक पाठकों के लिए मानस साहित्यिक महाकाव्य भी है और नित्य स्मरण का आधार भी।

गोस्वामी तुलसीदास

तुलसीदास भक्ति परंपरा के प्रमुख कवियों में हैं। उनकी रचना ने रामकथा को लोकभाषा, स्मरण और भक्तिपरक जीवन से गहराई से जोड़ा।

अवधी में रचना करके उन्होंने रामकथा को आत्मीय और गेय बनाया, जिससे संस्कृत परंपरा की कथा, भक्ति और दार्शनिक दृष्टि घर-घर के पाठ और सार्वजनिक कथा से जुड़ सकी।

कैसे पढ़ें

पाठ कैसे संगठित है

यह साइट श्रीरामचरितमानस को काण्ड, प्रकरण और अलग-अलग छंदों के रूप में प्रस्तुत करती है, ताकि मूल पाठ, लिप्यंतरण और अर्थ साथ-साथ पढ़े जा सकें।
कैसे नेविगेट करें

पहले काण्ड चुनें, फिर प्रकरण खोलें और उसके बाद छंदों को पाठ-क्रम में पढ़ें। अलग छंद पृष्ठों पर दोहा, चौपाई, सोरठा, छन्द और श्लोक के स्पष्ट संदर्भ मिलते हैं।

दोहा
१,१७२

संक्षिप्त दो-पंक्ति छंद, जो कथा या भाव के किसी मुख्य मोड़ को सहारा देता है।

चौपाई
४,६३८

मुख्य कथा-प्रवाह का प्रमुख छंद, जिसमें संवाद, प्रसंग और विस्तार चलते हैं।

सोरठा
८७

दोहा से सम्बद्ध छंद-रूप, जिसकी लय अलग है और जो चुने हुए प्रसंगों में आता है।

छन्द
२३१

विशेष लय वाले छंद, जिनका उपयोग स्तुति, वर्णन और नाटकीय प्रसंगों में होता है।

श्लोक
२७

संस्कृत छंद, जो विशेष रूप से मंगलाचरण और औपचारिक प्रसंगों में मिलते हैं।

सुझाव
कई पाठक मानस को दैनिक पाठ, प्रकरणानुसार पठन या सुन्दरकाण्ड के विशेष पाठ के रूप में पढ़ते हैं, जो हनुमानजी की भक्ति और साहस के कारण अत्यंत प्रिय है।
इस परियोजना के बारे में

परियोजना परिचय

श्रीरामचरितमानस का यह पठन-संस्करण पाठ-शुद्धि, शांत नेविगेशन और मूल ग्रंथ के निकट रहने वाले अनुभव पर केन्द्रित है।
विज्ञापन-मुक्त

पृष्ठ का ध्यान केवल पाठ पर रहता है, विज्ञापनों या अनावश्यक व्यवधानों पर नहीं।

डार्क मोड

लाइट और डार्क थीम लंबे पठन को सहज बनाते हैं।

मोबाइल अनुकूल

लेआउट मोबाइल के लिए सहज है और बड़े पर्दों पर भी खुला लगता है।

स्रोत-मिलानित पाठ

कई स्रोत-अंतर गीताप्रेस संस्करण से मिलाकर सुधारे गए हैं और शेष सुधार जारी हैं।