सुनत भरतु भए बिबस बिषादा

चौपाई २, दोहा १६० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सुनत भरतु भए बिबस बिषादा। जनु सहमेउ करि केहरि नादा॥ तात तात हा तात पुकारी। परे भूमितल ब्याकुल भारी॥ २ ॥

अर्थ

भरत यह सुनते ही विषाद के मारे विवश हो गये। मानो सिंह की गर्जना सुनकर हाथी सहम गया हो। वे “तात! तात! हा तात!” पुकारते हुए अत्यन्त व्याकुल होकर जमीन पर गिर पड़े।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या आगमन और दशरथ-निधन व राम-वनगमन का शोक का वर्णन है।

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भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक