जीवत सकल जनम फल पाए
जीवत सकल जनम फल पाए
चौपाई २, दोहा १६१ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
जीवत सकल जनम फल पाए। अंत अमरपति सदन सिधाए॥ अस अनुमानि सोच परिहरहू। सहित समाज राज पुर करहू॥ २ ॥
अर्थ
जीवनकाल में ही उन्होंने जन्म लेने के सम्पूर्ण फल पा लिये और अन्त में वे इन्द्रलोक को चले गये। ऐसा विचारकर सोच छोड़ दो और समाजसहित नगर का राज्य करो।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या आगमन और दशरथ-निधन व राम-वनगमन का शोक का वर्णन है।
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भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक