कूबर टूटेउ फूट कपारू

चौपाई ३, दोहा १६३ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

कूबर टूटेउ फूट कपारू। दलित दसन मुख रुधिर प्रचारू॥ आह दइअ मैं काह नसावा। करत नीक फलु अनइस पावा॥ ३ ॥

अर्थ

उसका कूबड़ टूट गया, सिर फट गया, दाँत टूट गये और मुँह से खून बहने लगा। [वह कराहती हुई बोली—] हाय दैव! मैंने क्या बिगाड़ा? जो भला करते, बुरा फल पाया।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या आगमन और दशरथ-निधन व राम-वनगमन का शोक का वर्णन है।

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भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक