सकल कुसल कहि भरत सुनाई

चौपाई ४, दोहा १५९ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

सकल कुसल कहि भरत सुनाई। पूँछी निज कुल कुसल भलाई॥ कहु कहँ तात कहाँ सब माता। कहँ सिय राम लखन प्रिय भ्राता॥ ४ ॥

अर्थ

भरतजी ने सब कुशल कह सुनायी। फिर अपने कुल की कुशल-भलाई पूछी। [भरतजी ने कहा--] कहो, पिताजी कहाँ हैं? मेरी सब माताएँ कहाँ हैं? सीताजी और मेरे प्यारे भाई राम-लक्ष्मण कहाँ हैं ?

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या आगमन और दशरथ-निधन व राम-वनगमन का शोक का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक