सुनि सुत बचन कहति कैकेई
सुनि सुत बचन कहति कैकेई
चौपाई ४, दोहा १६० के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि सुत बचन कहति कैकेई। मरमु पाँछि जनु माहुर देई॥ आदिहु तें सब आपनि करनी। कुटिल कठोर मुदित मन बरनी॥ ४ ॥
अर्थ
पुत्र का वचन सुनकर कैकेयी कहने लगी। मानो मर्मस्थान को पाछकर उसमें जहर भर रही हो। कुटिल और कठोर कैकेयी ने अपनी सब करनी शुरू से आखिर तक बड़े प्रसन्न मन से सुना दी।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १६० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भरत-शत्रुघ्न के अयोध्या आगमन और दशरथ-निधन व राम-वनगमन का शोक का वर्णन है।
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भरत-शत्रुघ्न का आगमन और शोक