कामदेव का देवकार्य के लिये जाना और भस्म होना
देवताओं के कार्य के लिए कामदेव शिवजी की तपस्या भंग करने जाता है। शिवजी के क्रोध से वह भस्म हो जाता है, और इस घटना से देवसमूह तथा रति दोनों व्याकुल हो उठते हैं।
बालकाण्ड · प्रकरण २३ / ५९
प्रकरण पाठ
अस कहि चलेउ सबहि सिरु नाई। सुमन धनुष कर सहित सहाई॥ चलत मार अस हृदयँ बिचारा। सिव बिरोध ध्रुव मरनु हमारा॥ २ ॥
अर्थ:
यों कहकर और सबको सिर नवाकर कामदेव अपने पुष्प के धनुष को हाथ में लेकर [वसंतादि] सहायकों के साथ चला। चलते समय कामदेव ने हृदय में ऐसा विचार किया कि शिवजी के साथ विरोध करने से मेरा मरण निश्चित है।
भए कामबस जोगीस तापस पावँरन्हि की को कहै। देखहिं चराचर नारिमय जे ब्रह्ममय देखत रहे॥ अबला बिलोकहिं पुरुषमय जगु पुरुष सब अबलामयं। दुइ दंड भरि ब्रह्मांड भीतर कामकृत कौतुक अयं॥
अर्थ:
जब योगीश्वर और तपस्वी भी काम के वश हो गये, तब पामर मनुष्यों की कौन कहे? जो समस्त चराचर जगत को ब्रह्ममय देखते थे, वे अब उसे स्त्रीमय देखने लगे। अबला सारे जग को पुरुषमय देखने लगीं और पुरुष उसे अबलामय देखने लगे। दो दंड भर ब्रह्माण्ड के भीतर कामकृत यह कौतुक रहा॥
फिरत लाज कछु करि नहिं जाई। मरनु ठानि मन रचेसि उपाई॥ प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा। कुसुमित नव तरु राजि बिराजा॥ ३ ॥
अर्थ:
लौटने में लज्जा लगती है और कुछ किया भी नहीं जा सकता। आखिर मन में मरने का निश्चय करके उसने उपाय रचा। तुरंत ही सुन्दर ऋतुराज प्रकट हुआ। फूले हुए नये-नये वृक्षों की कतारें सुशोभित हो गयीं।
जागइ मनोभव मुएहुँ मन बन सुभगता न परै कही। सीतल सुगंध सुमंद मारुत मदन अनल सखा सही॥ बिकसे सरन्हि बहु कंज गुंजत पुंज मंजुल मधुकरा। कलहंस पिक सुक सरस रव करि गान नाचहिं अपछरा॥
अर्थ:
मरे हुए मन में भी कामदेव जागने लगा, वन की सुन्दरता कही नहीं जा सकती। कामरूपी अग्नि का सच्चा मित्र शीतल, मन्द, सुगन्धित पवन चलने लगा। सरोवरों में अनेकों कमल खिल गये, जिन पर सुन्दर भौंरों के समूह गुंजार करने लगे। कलहंस, कोयल और तोते रसीली बोली बोलने लगे और अप्सराएँ गा-गाकर नाचने लगीं॥
देखि रसाल बिटप बर साखा। तेहि पर चढ़ेउ मदनु मन माखा॥ सुमन चाप निज सर संधाने। अति रिस ताकि श्रवन लगि ताने॥ १ ॥
अर्थ:
आम के वृक्ष की एक सुन्दर डाली देखकर मन में क्रोध से भरा हुआ कामदेव उस पर चढ़ गया। उसने पुष्प-धनुष पर अपने [पाँचों] बाण चढ़ाये और अत्यन्त क्रोध से [लक्ष्य की ओर] ताककर उन्हें कान तक तान लिया।