सकल कला करि कोटि बिधि हारेउ
सकल कला करि कोटि बिधि हारेउ
दोहा ८६ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सकल कला करि कोटि बिधि हारेउ सेन समेत। चली न अचल समाधि सिव कोपेउ हृदयनिकेत॥ ८६ ॥
अर्थ
कामदेव अपनी सेनासमेत करोड़ों प्रकार की सब कलाएँ (उपाय) करके हार गया, पर शिवजी की अचल समाधि न डिगी। तब कामदेव क्रोधित हो उठा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “कामदेव का भस्म होना” प्रकरण का दोहा ८६ है। इस प्रकरण में कामदेव का शिव की तपस्या भंग करने हेतु प्रस्थान और शिव के क्रोध से उनका भस्म का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
कामदेव का भस्म होना