अस कहि चलेउ सबहि सिरु नाई

चौपाई २, दोहा ८४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अस कहि चलेउ सबहि सिरु नाई। सुमन धनुष कर सहित सहाई॥ चलत मार अस हृदयँ बिचारा। सिव बिरोध ध्रुव मरनु हमारा॥ २ ॥

अर्थ

यों कहकर और सबको सिर नवाकर कामदेव अपने पुष्प के धनुष को हाथ में लेकर [वसंतादि] सहायकों के साथ चला। चलते समय कामदेव ने हृदय में ऐसा विचार किया कि शिवजी के साथ विरोध करने से मेरा मरण निश्चित है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “कामदेव का भस्म होना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कामदेव का शिव की तपस्या भंग करने हेतु प्रस्थान और शिव के क्रोध से उनका भस्म का वर्णन है।

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कामदेव का भस्म होना