जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी
जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी
चौपाई २, दोहा ८५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
जहँ असि दसा जड़न्ह कै बरनी। को कहि सकइ सचेतन करनी॥ पसु पच्छी नभ जल थल चारी। भए कामबस समय बिसारी॥ २ ॥
अर्थ
जहाँ ऐसी दशा जड़ों की कही गयी, वहाँ चेतन प्राणियों की करनी कौन कह सकता है? पशु-पक्षी, नभ, जल, थल-चारी, समय भूलकर काम के वश हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “कामदेव का भस्म होना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कामदेव का शिव की तपस्या भंग करने हेतु प्रस्थान और शिव के क्रोध से उनका भस्म का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
कामदेव का भस्म होना