तदपि करब मैं काजु तुम्हारा

चौपाई १, दोहा ८४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा॥ पर हित लागि तजइ जो देही। संतत संत प्रसंसहिं तेही॥ १ ॥

अर्थ

तथापि मैं तुम्हारा काम तो करूँगा, क्योंकि श्रुति दूसरे के उपकार को परम धर्म कहती है। जो दूसरे के हित के लिए अपना शरीर त्याग देता है, संत सदा उसकी प्रशंसा करते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “कामदेव का भस्म होना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कामदेव का शिव की तपस्या भंग करने हेतु प्रस्थान और शिव के क्रोध से उनका भस्म का वर्णन है।

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कामदेव का भस्म होना