जे सजीव जग अचर चर नारि
जे सजीव जग अचर चर नारि
दोहा ८४ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
जे सजीव जग अचर चर नारि पुरुष अस नाम। ते निज निज मरजाद तजि भए सकल बस काम॥ ८४ ॥
अर्थ
जगत में स्त्री-पुरुष संज्ञावाले जितने चर-अचर प्राणी थे, वे सब अपनी-अपनी मर्यादा छोड़कर काम के वश हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “कामदेव का भस्म होना” प्रकरण का दोहा ८४ है। इस प्रकरण में कामदेव का शिव की तपस्या भंग करने हेतु प्रस्थान और शिव के क्रोध से उनका भस्म का वर्णन है।
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कामदेव का भस्म होना