छाड़े बिषम बिसिख उर लागे
छाड़े बिषम बिसिख उर लागे
चौपाई २, दोहा ८७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
छाड़े बिषम बिसिख उर लागे। छूटि समाधि संभु तब जागे॥ भयउ ईस मन छोभु बिसेषी। नयन उघारि सकल दिसि देखी॥ २ ॥
अर्थ
कामदेव ने तीक्ष्ण पाँच बाण छोड़े, जो शिवजी के हृदय में लगे। तब उनकी समाधि टूट गयी और वे जाग गये। ईश्वर (शिवजी) के मन में बहुत क्षोभ हुआ। उन्होंने आँखें खोलकर सब ओर देखा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “कामदेव का भस्म होना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कामदेव का शिव की तपस्या भंग करने हेतु प्रस्थान और शिव के क्रोध से उनका भस्म का वर्णन है।
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कामदेव का भस्म होना