इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी
इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी
चौपाई ४, दोहा ८५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
इन्ह कै दसा न कहेउँ बखानी। सदा काम के चेरे जानी॥ सिद्ध बिरक्त महामुनि जोगी। तेपि कामबस भए बियोगी॥ ४ ॥
अर्थ
इन्हें उनकी दशा नहीं कहूँगा, क्योंकि वे सदा काम के चेले माने जाते हैं। सिद्ध, विरक्त, महामुनि और योगी भी काम के वश होकर वियोगी हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “कामदेव का भस्म होना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कामदेव का शिव की तपस्या भंग करने हेतु प्रस्थान और शिव के क्रोध से उनका भस्म का वर्णन है।
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कामदेव का भस्म होना