सब के हृदयँ मदन अभिलाषा

चौपाई १, दोहा ८५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सब के हृदयँ मदन अभिलाषा। लता निहारि नवहिं तरु साखा॥ नदीं उमगि अंबुधि कहुँ धाईं। संगम करहिं तलाव तलाईं॥ १ ॥

अर्थ

सबके हृदय में काम की अभिलाषा हो गयी। लताओं को देखकर वृक्षों की शाखाएँ झुकने लगीं। नदियाँ उमड़कर समुद्र की ओर दौड़ीं और संगम करने लगीं ताल-तलाईँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “कामदेव का भस्म होना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कामदेव का शिव की तपस्या भंग करने हेतु प्रस्थान और शिव के क्रोध से उनका भस्म का वर्णन है।

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कामदेव का भस्म होना