भए तुरत सब जीव सुखारे

चौपाई २, दोहा ८६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भए तुरत सब जीव सुखारे। जिमि मद उतरि गएँ मतवारे॥ रुद्रहि देखि मदन भय माना। दुराधरष दुर्गम भगवाना॥ २ ॥

अर्थ

तुरंत ही सब जीव वैसे ही सुखी हो गये जैसे मतवाले (नशा पिये हुए) लोग मद (नशा) उतर जाने पर सुखी होते हैं। दुराधर्ष, दुर्गम भगवान् रुद्र को देखकर कामदेव भयभीत हो गया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “कामदेव का भस्म होना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में कामदेव का शिव की तपस्या भंग करने हेतु प्रस्थान और शिव के क्रोध से उनका भस्म का वर्णन है।

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कामदेव का भस्म होना