राजाओं से धनुष न उठना, जनक की निराशाजनक वाणी
अनेक बलवान राजा प्रयास करने पर भी शिवधनुष को हिला तक नहीं पाते। इससे जनकजी खिन्न होकर ऐसी वाणी कहते हैं, जिसे सुनकर सभा स्तब्ध रह जाती है।
बालकाण्ड · प्रकरण ५० / ५९
प्रकरण पाठ
दोहा 251 के अंतर्गत
दोहा 252 के अंतर्गत