सुनि पन सकल भूप अभिलाषे
सुनि पन सकल भूप अभिलाषे
चौपाई ३, दोहा २५० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि पन सकल भूप अभिलाषे। भटमानी अतिसय मन माखे॥ परिकर बाँधि उठे अकुलाई। चले इष्टदेवन्ह सिर नाई॥ ३ ॥
अर्थ
प्रण सुनकर सभी राजा लालायित हो उठे। जो वीरता के अभिमानी थे, वे मन में बहुत ही तमतमा उठे। कमर कसकर अकुलाते हुए उठे और अपने-अपने इष्टदेवों को सिर नवाकर चले।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “राजाओं से धनुष न उठना, जनक की निराशा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २५० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजाओं द्वारा शिवधनुष न उठा पाने पर जनक की निराशा और खिन्न वाणी का वर्णन है।
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राजाओं से धनुष न उठना, जनक की निराशा