कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति
कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति
दोहा २५१ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
कुअँरि मनोहर बिजय बड़ि कीरति अति कमनीय। पावनिहार बिरंचि जनु रचेउ न धनु दमनीय॥ २५१ ॥
अर्थ
कन्या, सुंदर विजय, बड़ी कीर्ति और अत्यन्त मनोहरता—यह सब पानेवाला मानो ब्रह्मा ने ही धनुष न रचा हो, जो दमाया जा सके।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “राजाओं से धनुष न उठना, जनक की निराशा” प्रकरण का दोहा २५१ है। इस प्रकरण में राजाओं द्वारा शिवधनुष न उठा पाने पर जनक की निराशा और खिन्न वाणी का वर्णन है।
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राजाओं से धनुष न उठना, जनक की निराशा