बंदीजनों द्वारा जनकप्रतिज्ञा की घोषणा
बंदीजन सभा में जनक की प्रतिज्ञा का उद्घोष करते हैं कि जो वीर शिवधनुष उठाकर चढ़ाएगा, वही सीता का वरण करेगा। यह सुनकर राजाओं का उत्साह और प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है।
बालकाण्ड · प्रकरण ४९ / ५९
प्रकरण पाठ
दोहा 250 के अंतर्गत
नृप भुजबल बिधु सिवधनु राहू। गरुअ कठोर बिदित सब काहू॥ रावनु बानु महाभट भारे। देखि सरासन गवँहिं सिधारे॥ १ ॥
अर्थ:
राजाओं के भुजाओं का बल चन्द्रमा है, शिवजी का धनुष राहु है। वह भारी है, कठोर है, यह सबको विदित है। बड़े भारी योद्धा रावण और बाणासुर भी इस धनुष को देखकर भाग खड़े हुए (उसे उठाना तो दूर रहा, छूने तक की हिम्मत न हुई)।