दीप दीप के भूपति नाना
दीप दीप के भूपति नाना
चौपाई ४, दोहा २५१ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
दीप दीप के भूपति नाना। आए सुनि हम जो पनु ठाना॥ देव दनुज धरि मनुज सरीरा। बिपुल बीर आए रनधीरा॥ ४ ॥
अर्थ
मैंने जो प्रण ठाना था, उसे सुनकर द्वीप-द्वीप के अनेक राजा आये। देवता और दैत्य भी मनुष्य का शरीर धारण करके आये तथा बहुत-से रणधीर वीर आये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “राजाओं से धनुष न उठना, जनक की निराशा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजाओं द्वारा शिवधनुष न उठा पाने पर जनक की निराशा और खिन्न वाणी का वर्णन है।
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राजाओं से धनुष न उठना, जनक की निराशा