श्रीरामजी की प्रलापलीला, हनुमानजी का लौटना, लक्ष्मणजी का उठ बैठना
लक्ष्मणजी की दशा देखकर श्रीरामजी करुण प्रलाप करते हैं। तभी हनुमानजी लौटते हैं, औषधि का प्रभाव होता है और लक्ष्मणजी उठ बैठते हैं।
लंकाकाण्ड · प्रकरण १६ / ३७
प्रकरण पाठ
बहु बिधि सोचत सोच बिमोचन। स्रवत सलिल राजिव दल लोचन॥ उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई॥ ९ ॥
अर्थ:
सोच से छुड़ानेवाले श्रीरामजी बहुत प्रकार से सोच कर रहे हैं। उनके कमल-दल के समान नेत्रों से [विषाद के आँसुओं का] जल बह रहा है। [शिवजी कहते हैं--] हे उमा! श्रीरघुराई एक (अद्वितीय) और अखण्ड (वियोगरहित) हैं। भक्तों पर कृपा करनेवाले भगवान् ने [लीला करके] मनुष्य की गति दिखाई है।
दोहा 62 के अंतर्गत