अब अपलोकु सोकु सुत तोरा
अब अपलोकु सोकु सुत तोरा
चौपाई ७, दोहा ६१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा॥ निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा॥ ७ ॥
अर्थ
अब तो हे पुत्र! मेरा निष्ठुर और कठोर हृदय यह अपयश और तुम्हारा शोक दोनों ही सहन करेगा। हे तात! तुम अपनी माता के एक ही पुत्र और उसके प्राणाधार हो।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा ६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम के करुण विलाप, हनुमान के लौटने और लक्ष्मण के पुनर्जीवित होने का वर्णन है।
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राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना