हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता

चौपाई २, दोहा ६२ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता॥ कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा॥ २ ॥

अर्थ

प्रभु भाई को हृदय से लगाकर मिले। भालू और वानरों के समूह सब हर्षित हो गए। फिर हनुमानजी ने वैद्य को उसी प्रकार वहाँ पहुँचा दिया जिस प्रकार वे उस बार उसे ले आए थे।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ६२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम के करुण विलाप, हनुमान के लौटने और लक्ष्मण के पुनर्जीवित होने का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना