सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी
सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी
चौपाई ८, दोहा ६१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी॥ उतरु काह दैहउँ तेहि जाई। उठि किन मोहि सिखावहु भाई॥ ८ ॥
अर्थ
सब प्रकार से सुखद और परम हितकारी जानकर उन्होंने तुम्हें हाथ पकड़कर मुझे सौंप दिया था। मैं अब जाकर उन्हें क्या उत्तर दूँगा? हे भाई! तुम उठकर मुझे क्यों नहीं समझाते?
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना” प्रकरण का चौपाई ८, दोहा ६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम के करुण विलाप, हनुमान के लौटने और लक्ष्मण के पुनर्जीवित होने का वर्णन है।
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राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना