प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए

सोरठा ६१ · लंकाकाण्ड

सोरठा पाठ

प्रभु प्रलाप सुनि कान बिकल भए बानर निकर। आइ गयउ हनुमान जिमि करुना महँ बीर रस॥ ६१ ॥

अर्थ

प्रभु के [लीलाके लिये किये गये] प्रलाप को कानों से सुनकर वानरों के समूह व्याकुल हो गए। [इतने में ही] हनुमानजी आ गए, जैसे करुणा में वीर रस का उदय हो जाता है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना” प्रकरण का सोरठा ६१ है। इस प्रकरण में राम के करुण विलाप, हनुमान के लौटने और लक्ष्मण के पुनर्जीवित होने का वर्णन है।

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राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना