सो अनुराग कहाँ अब भाई

चौपाई ३, दोहा ६१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

सो अनुराग कहाँ अब भाई। उठहु न सुनि मम बच बिकलाई॥ जौं जनतेउँ बन बंधु बिछोहू। पिता बचन मनतेउँ नहिं ओहू॥ ३ ॥

अर्थ

हे भाई! वह प्रेम अब कहाँ है? मेरे व्याकुल वचन सुनकर उठते क्यों नहीं? यदि मैं जानता कि वन में भाई का विछोह होगा तो मैं पिता का वचन भी न मानता।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम के करुण विलाप, हनुमान के लौटने और लक्ष्मण के पुनर्जीवित होने का वर्णन है।

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राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना