बहु बिधि सोचत सोच बिमोचन

चौपाई ९, दोहा ६१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

बहु बिधि सोचत सोच बिमोचन। स्रवत सलिल राजिव दल लोचन॥ उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई॥ ९ ॥

अर्थ

सोच से छुड़ानेवाले श्रीरामजी बहुत प्रकार से सोच कर रहे हैं। उनके कमल-दल के समान नेत्रों से [विषाद के आँसुओं का] जल बह रहा है। [शिवजी कहते हैं--] हे उमा! श्रीरघुराई एक (अद्वितीय) और अखण्ड (वियोगरहित) हैं। भक्तों पर कृपा करनेवाले भगवान् ने [लीला करके] मनुष्य की गति दिखाई है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना” प्रकरण का चौपाई ९, दोहा ६१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम के करुण विलाप, हनुमान के लौटने और लक्ष्मण के पुनर्जीवित होने का वर्णन है।

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राम का विलाप, लक्ष्मण का उठना