विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा
राम और लक्ष्मण विश्वामित्र के साथ वन में जाकर ताड़का का वध करते हैं और यज्ञ की रक्षा करते हैं। वे मारीच और सुबाहु को परास्त कर ऋषियों को निर्भय कर देते हैं।
बालकाण्ड · प्रकरण ४० / ५९
प्रकरण पाठ
पावक सर सुबाहु पुनि मारा। अनुज निसाचर कटकु सँघारा॥ मारि असुर द्विज निर्भयकारी। अस्तुति करहिं देव मुनि झारी॥ ३ ॥
अर्थ:
फिर सुबाहु को अग्निबाण मारा। इधर छोटे भाई लक्ष्मणजी ने राक्षसों की सेना का संहार कर डाला। इस प्रकार श्रीरामजी ने राक्षसों को मारकर ब्राह्मणों को निर्भय कर दिया। तब सारे देवता और मुनि स्तुति करने लगे।