प्रात कहा मुनि सन रघुराई

चौपाई १, दोहा २१० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रात कहा मुनि सन रघुराई। निर्भय जग्य करहु तुम्ह जाई॥ होम करन लागे मुनि झारी। आपु रहे मख कीं रखवारी॥ १ ॥

अर्थ

सबेरे श्रीरघुनाथजी ने मुनि से कहा—आप जाकर निडर होकर यज्ञ कीजिये। यह सुनकर सब मुनि हवन करने लगे। आप (श्रीरामजी) यज्ञ की रखवाली पर रहे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २१० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम द्वारा ताड़का-वध, सुबाहु-मारीच परास्त और विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा का वर्णन है।

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विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा