आश्रम एक दीख मग माहीं
आश्रम एक दीख मग माहीं
चौपाई ६, दोहा २१० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
आश्रम एक दीख मग माहीं। खग मृग जीव जंतु तहँ नाहीं॥ पूछा मुनिहि सिला प्रभु देखी। सकल कथा मुनि कहा बिसेषी॥ ६ ॥
अर्थ
मार्ग में एक आश्रम दिखायी पड़ा। वहाँ पशु-पक्षी, कोई भी जीव-जन्तु नहीं था। पत्थर की एक शिला को देखकर प्रभु ने पूछा, तब मुनि ने विस्तारपूर्वक सब कथा कही।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा २१० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम द्वारा ताड़का-वध, सुबाहु-मारीच परास्त और विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा का वर्णन है।
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विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा