पावक सर सुबाहु पुनि मारा

चौपाई ३, दोहा २१० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पावक सर सुबाहु पुनि मारा। अनुज निसाचर कटकु सँघारा॥ मारि असुर द्विज निर्भयकारी। अस्तुति करहिं देव मुनि झारी॥ ३ ॥

अर्थ

फिर सुबाहु को अग्निबाण मारा। इधर छोटे भाई लक्ष्मणजी ने राक्षसों की सेना का संहार कर डाला। इस प्रकार श्रीरामजी ने राक्षसों को मारकर ब्राह्मणों को निर्भय कर दिया। तब सारे देवता और मुनि स्तुति करने लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २१० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम द्वारा ताड़का-वध, सुबाहु-मारीच परास्त और विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा का वर्णन है।

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विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा