तहँ पुनि कछुक दिवस रघुराया

चौपाई ४, दोहा २१० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तहँ पुनि कछुक दिवस रघुराया। रहे कीन्हि बिप्रन्ह पर दाया॥ भगति हेतु बहु कथा पुराना। कहे बिप्र जद्यपि प्रभु जाना॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीरघुनाथजी ने वहाँ कुछ दिन और रहकर ब्राह्मणों पर दया की। भक्ति के कारण ब्राह्मणों ने उन्हें पुराणों की बहुत-सी कथाएँ कहीं, यद्यपि प्रभु सब जानते थे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २१० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम द्वारा ताड़का-वध, सुबाहु-मारीच परास्त और विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा का वर्णन है।

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विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा