तब मुनि सादर कहा बुझाई
तब मुनि सादर कहा बुझाई
चौपाई ५, दोहा २१० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तब मुनि सादर कहा बुझाई। चरित एक प्रभु देखिअ जाई॥ धनुषजग्य सुनि रघुकुल नाथा। हरषि चले मुनिबर के साथा॥ ५ ॥
अर्थ
तदनन्तर मुनि ने आदरपूर्वक समझाकर कहा—हे प्रभो! चलकर एक चरित्र देखिये। रघुकुल के स्वामी श्रीरामचन्द्रजी धनुषयज्ञ [की बात] सुनकर मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्रजी के साथ प्रसन्न होकर चले।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा २१० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राम द्वारा ताड़का-वध, सुबाहु-मारीच परास्त और विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा का वर्णन है।
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विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा