बिप्र जेवाँइ देहिं दिन दाना

चौपाई ४, दोहा १५७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

बिप्र जेवाँइ देहिं दिन दाना। सिव अभिषेक करहिं बिधि नाना॥ मागहिं हृदयँ महेस मनाई। कुसल मातु पितु परिजन भाई॥ ४ ॥

अर्थ

ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान देते थे। अनेक विधियों से रुद्राभिषेक करते थे। महादेवजी को हृदय में मनाकर उनसे माता-पिता, परिजन और भाइयों का कुशल-क्षेम माँगते थे।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वशिष्ठ का भरत को बुलाने हेतु दूत भेजना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ के देहावसान के बाद वशिष्ठ द्वारा भरत और शत्रुघ्न को अयोध्या बुलाने हेतु दूत-प्रेषण का वर्णन है।

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वशिष्ठ का भरत को बुलाने हेतु दूत भेजना