एतनेइ कहेहु भरत सन जाई
एतनेइ कहेहु भरत सन जाई
चौपाई २, दोहा १५७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड
चौपाई पाठ
एतनेइ कहेहु भरत सन जाई। गुर बोलाइ पठयउ दोउ भाई॥ सुनि मुनि आयसु धावन धाए। चले बेग बर बाजि लजाए॥ २ ॥
अर्थ
जाकर भरत से इतना ही कहना कि दोनों भाइयों को गुरुजी ने बुलवा भेजा है। गुरु की आज्ञा सुनकर धावन (दूत) दौड़े। वे अपने वेग से उत्तम घोड़ों को भी लजाते हुए चले।
संदर्भ
यह अयोध्याकाण्ड के “वशिष्ठ का भरत को बुलाने हेतु दूत भेजना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ के देहावसान के बाद वशिष्ठ द्वारा भरत और शत्रुघ्न को अयोध्या बुलाने हेतु दूत-प्रेषण का वर्णन है।
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वशिष्ठ का भरत को बुलाने हेतु दूत भेजना