तेल नावँ भरि नृप तनु राखा

चौपाई १, दोहा १५७ के अंतर्गत · अयोध्याकाण्ड

चौपाई पाठ

तेल नावँ भरि नृप तनु राखा। दूत बोलाइ बहुरि अस भाषा॥ धावहु बेगि भरत पहिं जाहू। नृप सुधि कतहुँ कहहु जनि काहू॥ १ ॥

अर्थ

वसिष्ठजी ने नाव में तेल भरवाकर राजा के शरीर को उसमें रखवा दिया। फिर दूतों को बुलवाकर उनसे ऐसा कहा--तुम लोग जल्दी दौड़कर भरत के पास जाओ। राजा की मृत्यु का समाचार कहीं किसी से न कहना।

संदर्भ

यह अयोध्याकाण्ड के “वशिष्ठ का भरत को बुलाने हेतु दूत भेजना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा १५७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में दशरथ के देहावसान के बाद वशिष्ठ द्वारा भरत और शत्रुघ्न को अयोध्या बुलाने हेतु दूत-प्रेषण का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
वशिष्ठ का भरत को बुलाने हेतु दूत भेजना