रावण का विभीषण पर शक्ति छोड़ना, रामजी का शक्ति को अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण युद्ध
रावण विभीषण पर शक्ति चलाता है, पर रामजी उसे अपने ऊपर ले लेते हैं। भक्त-रक्षा की यह लीला देख विभीषण पुनः युद्ध में प्रवृत्त होते हैं।
लंकाकाण्ड · प्रकरण २५ / ३७
प्रकरण पाठ
दोहा 94 के अंतर्गत
उर माझ गदा प्रहार घोर कठोर लागत महि पर्यो। दस बदन सोनित स्रवत पुनि संभारि धायो रिस भर्यो॥ द्वौ भिरे अतिबल मल्लजुद्ध बिरुद्ध एकु एकहि हनै। रघुबीर बल दर्पित बिभीषनु घालि नहिं ता कहुँ गनै॥
अर्थ:
बीच छाती में गदा की घोर कठोर चोट लगते ही वह पृथ्वी पर गिर पड़ा। उसके दसों मुखों से रक्त बहने लगा; वह फिर सँभलकर क्रोध से भरकर दौड़ा। दोनों अत्यन्त बलवान् योद्धा भिड़ गये और मल्लयुद्ध में एक-दूसरे के विरुद्ध होकर मारने लगे। श्रीरघुवीर के बल से गर्वित विभीषण उसे कुछ नहीं गिनता॥