उर माझ गदा प्रहार घोर कठोर

छन्द, दोहा ९४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

छन्द पाठ

उर माझ गदा प्रहार घोर कठोर लागत महि पर्‌यो। दस बदन सोनित स्रवत पुनि संभारि धायो रिस भर्‌यो॥ द्वौ भिरे अतिबल मल्लजुद्ध बिरुद्ध एकु एकहि हनै। रघुबीर बल दर्पित बिभीषनु घालि नहिं ता कहुँ गनै॥

अर्थ

बीच छाती में गदा की घोर कठोर चोट लगते ही वह पृथ्वी पर गिर पड़ा। उसके दसों मुखों से रक्त बहने लगा; वह फिर सँभलकर क्रोध से भरकर दौड़ा। दोनों अत्यन्त बलवान् योद्धा भिड़ गये और मल्लयुद्ध में एक-दूसरे के विरुद्ध होकर मारने लगे। श्रीरघुवीर के बल से गर्वित विभीषण उसे कुछ नहीं गिनता॥

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “राम ने विभीषण की शक्ति अपने पर ली” प्रकरण का छन्द, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की शक्ति से विभीषण की रक्षा हेतु राम का स्वयं शक्ति सहना और विभीषण-रावण युद्ध का वर्णन है।

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राम ने विभीषण की शक्ति अपने पर ली