रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे
रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे
चौपाई ३, दोहा ९४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
रे कुभाग्य सठ मंद कुबुद्धे। तैं सुर नर मुनि नाग बिरुद्धे॥ सादर सिव कहुँ सीस चढ़ाए। एक एक के कोटिन्ह पाए॥ ३ ॥
अर्थ
[और बोले--] रे कुभाग्य, सठ, मंद, कुबुद्धि! तैं सुर, नर, मुनि, नाग विरुद्धे॥ सादर शिव को सीस चढ़ाए। एक-एक के करोड़ों पाए॥
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम ने विभीषण की शक्ति अपने पर ली” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की शक्ति से विभीषण की रक्षा हेतु राम का स्वयं शक्ति सहना और विभीषण-रावण युद्ध का वर्णन है।
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राम ने विभीषण की शक्ति अपने पर ली