तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो
तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो
चौपाई ४, दोहा ९४ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहि कारन खल अब लगि बाँच्यो। अब तव कालु सीस पर नाच्यो॥ राम बिमुख सठ चहसि संपदा। अस कहि हनेसि माझ उर गदा॥ ४ ॥
अर्थ
उसी कारण से अरे दुष्ट! तू अब तक बचा है। [किन्तु] अब तेरे सिर पर काल नाच रहा है। राम विमुख, सठ! तू सम्पदा चाहता है? ऐसा कहकर विभीषण ने रावण की छाती के बीचो-बीच गदा मारी।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम ने विभीषण की शक्ति अपने पर ली” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में रावण की शक्ति से विभीषण की रक्षा हेतु राम का स्वयं शक्ति सहना और विभीषण-रावण युद्ध का वर्णन है।
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राम ने विभीषण की शक्ति अपने पर ली