गुफा में तपस्विनी स्वयंप्रभा के दर्शन
सीताजी की खोज करते हुए वानर एक अद्भुत गुफा में पहुँचते हैं, जहाँ तपस्विनी स्वयंप्रभा से उनका मिलन होता है। वह उनका आदरपूर्वक सत्कार करती हैं और उन्हें आगे का मार्ग दिखाती हैं।
किष्किन्धाकाण्ड · प्रकरण ११ / १४
प्रकरण पाठ
मूदहु नयन बिबर तजि जाहू। पैहहु सीतहि जनि पछिताहू॥ नयन मूदि पुनि देखहिं बीरा। ठाढ़े सकल सिंधु कें तीरा॥ ३ ॥
अर्थ:
तुम लोग आँखें मूँद लो और गुफा को छोड़कर बाहर जाओ। तुम सीताजी को पा जाओगे, पछताओ नहीं (निराश न होओ)। आँखें मूँदकर फिर जब आँखें खोलीं तो सब वीर क्या देखते हैं कि सब समुद्र के तीर पर खड़े हैं।